मिड-डे मील योजना क्या है?
मिड-डे मील योजना भारत सरकार की एक प्रमुख सामाजिक कल्याण योजना है, जिसके अंतर्गत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल समय में मुफ्त पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार करना और उन्हें नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करना है।
यह योजना आज देश की सबसे बड़ी स्कूल भोजन योजनाओं में से एक है, जिससे करोड़ों बच्चे प्रतिदिन लाभान्वित होते हैं। बाद में इस योजना को और प्रभावी बनाने के लिए इसका नाम बदलकर पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना कर दिया गया, लेकिन आम जनता आज भी इसे मिड-डे मील योजना के नाम से ही जानती है।
मिड-डे मील योजना शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी?
देश के कई गरीब और ग्रामीण इलाकों में बच्चे कुपोषण का शिकार थे और आर्थिक तंगी के कारण नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते थे। कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने लगते थे। इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने यह योजना शुरू की, ताकि बच्चों को एक समय का पौष्टिक भोजन मिल सके और वे शिक्षा से जुड़े रहें।
मिड-डे मील योजना का मुख्य उद्देश्य
- बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना
- कुपोषण की समस्या को कम करना
- स्कूलों में नामांकन बढ़ाना
- ड्रॉपआउट दर को कम करना
- बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना
मिड-डे मील योजना के लाभ
- छात्रों को मुफ्त गर्म और पौष्टिक भोजन
- गरीब परिवारों पर भोजन का बोझ कम
- बच्चों की सेहत और एकाग्रता में सुधार
- स्कूलों में उपस्थिति बढ़ती है
- सामाजिक समानता को बढ़ावा
कौन-कौन से छात्र इस योजना के पात्र हैं?
- सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र
- सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के छात्र
- कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे
- ईजीएस और एआईई केंद्रों के छात्र
मिड-डे मील योजना के अंतर्गत मिलने वाला भोजन
योजना के अंतर्गत बच्चों को उनके पोषण स्तर को ध्यान में रखते हुए संतुलित भोजन दिया जाता है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स शामिल होते हैं।
| कक्षा | पोषण मानक |
|---|---|
| कक्षा 1-5 | 450 कैलोरी, 12 ग्राम प्रोटीन |
| कक्षा 6-8 | 700 कैलोरी, 20 ग्राम प्रोटीन |
मिड-डे मील योजना का साप्ताहिक मेन्यू
- दाल-चावल
- सब्जी-रोटी
- खिचड़ी
- चावल-सब्जी
- मौसमी फल (कुछ राज्यों में)
योजना के अंतर्गत स्वच्छता और गुणवत्ता
भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। रसोइयों को साफ-सफाई के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है और समय-समय पर भोजन की जांच भी की जाती है।
मिड-डे मील योजना में रसोइयों की भूमिका
इस योजना के तहत स्कूलों में स्थानीय महिलाओं को रसोइया या सहायक के रूप में रोजगार दिया जाता है। इससे महिलाओं को आय का स्रोत मिलता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ता है।
योजना के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य की भूमिका
मिड-डे मील योजना का संचालन केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करती हैं। केंद्र सरकार खाद्यान्न और वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जबकि राज्य सरकारें योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और वितरण का कार्य करती हैं।
Official Website (Process / Update):
https://pmposhan.education.gov.in
योजना से शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रभाव
इस योजना से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नियमित भोजन मिलने से बच्चों की सेहत बेहतर हुई है और वे पढ़ाई में अधिक ध्यान लगा पा रहे हैं।
मिड-डे मील योजना से जुड़ी चुनौतियां
- कुछ क्षेत्रों में गुणवत्ता की समस्या
- भोजन वितरण में देरी
- रसोई की आधारभूत सुविधाओं की कमी
FAQ – मिड-डे मील योजना
FAQ 1: मिड-डे मील योजना किसके लिए है?
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए।
FAQ 2: क्या यह योजना पूरे भारत में लागू है?
हाँ, यह केंद्र सरकार की योजना है।
FAQ 3: क्या भोजन पूरी तरह मुफ्त होता है?
हाँ, छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
FAQ 4: क्या निजी स्कूलों के छात्र पात्र हैं?
नहीं, केवल सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्र।
FAQ 5: भोजन में क्या-क्या दिया जाता है?
दाल, चावल, सब्जी, रोटी और खिचड़ी।
FAQ 6: क्या भोजन की गुणवत्ता जांची जाती है?
हाँ, समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है।
FAQ 7: रसोइयों का चयन कैसे होता है?
स्थानीय स्तर पर स्कूल प्रबंधन द्वारा।
FAQ 8: क्या यह योजना कुपोषण कम करती है?
हाँ, इससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ है।
FAQ 9: योजना का नया नाम क्या है?
पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना।
FAQ 10: योजना की जानकारी कहां मिलेगी?
शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर।
इस योजना से जुड़ी सभी नवीनतम जानकारी और अपडेट्स पाने के लिए
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